इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (आईएमएफ) की एमडी क्रिस्टेलिना जियोर्जिवा ने कोरोना से हो रहे आर्थिक नुकसान पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने शुक्रवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन के सम्मेलन में कहा कि हम मंदी के दौर से गुजर रहे हैं। इसकी स्थिति 2008 में आई वैश्विक मंदी से भी बदतर हो सकती है। कोरोना की वजह से आईएमएफ के इतिहास का यह सबसे अप्रत्याशित समय है। इससे दोहरा संकट पैदा हुआ है। यह स्वास्थ्य और आर्थिक क्षेत्र दोनों पर असर डाल रहा है।
जियोर्जिवा ने कहा कि कोरोना दुनिया भर में फैल चुका है। ऐसे में लोगों की जिंदगी और उनकी नौकरियां बचाने का काम साथ-साथ होना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन(डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, दुनियाभर में संक्रमण के 10 लाख से ज्यादा केस मिले हैं और 50 हजार से ज्यादा मौतें हुई हैं।
‘मंदी से उबारने के लिए हम पूरी क्षमता लगा रहे’
जियोर्जिवा के मुताबिक, इस संकट से निपटने के लिए आईएमएफ 1 ट्रिलियन डॉलर (करीब 76 लाख करोड़ रुपए) लगा रहा है। दुनिया की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए जितना जरूरी होगा, हम उसके सारे प्रयास कर रहे हैं। मौजूदा बाजार में 90 बिलियन डॉलर (करीब 9000 करोड़ रु.) की कमी हो गई है, यह 2008 की वैश्विक मंदी में हुई कमी से भी ज्यादा है। आईएमएफ मंदी से प्रभावित विकासशील देशों और उभरते बाजारों के लिए इमरजेंसी फंडिंग जुटा रहा है।
‘मौजूदा स्थिति से लगता है दिवालिया होने वालों की संख्या बढ़ेगी’
जियोर्जिवा ने कहा कि मौजूदा स्थिति से ऐसा लगता है कि दिवालिया होने वालों की संख्या बढ़ सकती है। ऐसे में आईएमएफ के कर्ज की रिकवरी मुश्किल हो सकती है। 90 देशों ने आईएमएफ से इमरजेंसी फंडिंग का अनुरोध किया है। इन से अनुरोध किया है कि वे इस राशि का इस्तेमाल स्वास्थ्य कर्मियों का वेतन देने और स्वास्थ्य सुविधाओं को सुचारू रखने के लिए करें। इसके साथ ही वे प्रभाविल लोगों और संस्थाओं की मदद करें